यूपी के अगले डीजीपी पर सस्पेंस बरकरार, आज हो सकता है फैसला

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यूपी के अगले डीजीपी पर सस्पेंस बरकरार, आज हो सकता है फैसला, प्रवीण सिंह का नाम सबसे आगे  प्रदेश का अगला डीजीपी कौन होगा, इसको लेकर सस्पेंस बरकरार है। मौजूदा डीजीपी सुलखान सिंह 31 दिसंबर को रिटायर हो रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि उन्हें सेवा विस्तार मिलने की संभावना लगभग खत्म हो गई है। नए साल में प्रदेश को नया डीजीपी मिलेगा। इसको लेकर कयास लगाए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात किसी अधिकारी को यूपी पुलिस की बागडोर नहीं दी जाएगी। दरअसल प्रतिनियुक्ति से किसी अधिकारी को प्रदेश में वापस लाने के लिए दो से तीन दिन का समय लगेगा। अब उतना समय नहीं बचा है। डीजीपी के लिए जिन नामों की सबसे अधिक चर्चा चल रही है, उनमें वरिष्ठता के आधार पर पहला नंबर प्रवीण सिंह का है।  डीजी फायर के पद पर तैनात प्रवीण का कार्यकाल जून 2018 तक है। दूसरे नंबर पर भवेश कुमार सिंह हैं। वे मुख्यमंत्री की गुडबुक में भी हैं। सरकार को ऐसे डीजीपी की तलाश भी है जो 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव को संपन्न करा सके। भवेश कुमार का माइनस पॉइंट डीजी रैंक के अफसरों में अधिकतर से जूनियर होना है।  हालांकि प्रदेश में इससे पहले भी कई डीजीपी अपने से सीनियर को सुपरसीड करके डीजीपी की कुर्सी तक पहुंचे हैं, पर भाजपा इसके खिलाफ रही है। ऐसे में हितेश अवस्थी और गोपाल गुप्ता में से भी किसी एक को डीजीपी बनाने पर विचार हो सकता है। इन दोनों ही का कार्यकाल जून 2019 से अधिक है।  प्रवीण सिंह की संभावना सबसे अधिक  सूत्रों का कहना है वरिष्ठता के आधार पर अगला डीजीपी तय होने की संभावना अधिक है। ऐसे में प्रवीण सिंह नए डीजीपी बन सकते हैं। 1982 बैच के आईपीएस प्रवीण पिथौरागढ़ (अब उत्तराखंड में), बिजनौर, आजमगढ़, लखीमपुर खीरी और कानपुर के पुलिस कप्तान रह चुके हैं।  सहारनपुर रेंज के डीआईजी और वाराणसी जोन के आईजी रह चुके हैं। 2009 में मायावती ने उन्हें लखनऊ रेंज का आईजी बनाया था, लेकिन तीन महीने बाद ही वह प्रतिनियुक्ति पर हरियाणा चले गए थे।  2012 में प्रतिनियुक्ति से लौटे तो अखिलेश ने उन्हें एडीजी फायर सर्विसेज की जिम्मेदारी दी। इसी पद पर रहते हुए वह डीजी के पद पर प्रमोट हुए। 3 जुलाई 2015 को उन्हें सीबीसीआईडी का डीजी बनाया गया, लेकिन सात माह बाद ही उन्हें वापस डीजी फायर सर्विसेज के पद पर भेज दिया गया।

प्रदेश का अगला डीजीपी कौन होगा, इसको लेकर सस्पेंस बरकरार है। मौजूदा डीजीपी सुलखान सिंह 31 दिसंबर को रिटायर हो रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि उन्हें सेवा विस्तार मिलने की संभावना लगभग खत्म हो गई है। नए साल में प्रदेश को नया डीजीपी मिलेगा। इसको लेकर कयास लगाए जा रहे हैं।
माना जा रहा है कि केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात किसी अधिकारी को यूपी पुलिस की बागडोर नहीं दी जाएगी। दरअसल प्रतिनियुक्ति से किसी अधिकारी को प्रदेश में वापस लाने के लिए दो से तीन दिन का समय लगेगा। अब उतना समय नहीं बचा है। डीजीपी के लिए जिन नामों की सबसे अधिक चर्चा चल रही है, उनमें वरिष्ठता के आधार पर पहला नंबर प्रवीण सिंह का है।

डीजी फायर के पद पर तैनात प्रवीण का कार्यकाल जून 2018 तक है। दूसरे नंबर पर भवेश कुमार सिंह हैं। वे मुख्यमंत्री की गुडबुक में भी हैं। सरकार को ऐसे डीजीपी की तलाश भी है जो 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव को संपन्न करा सके। भवेश कुमार का माइनस पॉइंट डीजी रैंक के अफसरों में अधिकतर से जूनियर होना है।

हालांकि प्रदेश में इससे पहले भी कई डीजीपी अपने से सीनियर को सुपरसीड करके डीजीपी की कुर्सी तक पहुंचे हैं, पर भाजपा इसके खिलाफ रही है। ऐसे में हितेश अवस्थी और गोपाल गुप्ता में से भी किसी एक को डीजीपी बनाने पर विचार हो सकता है। इन दोनों ही का कार्यकाल जून 2019 से अधिक है।

प्रवीण सिंह की संभावना सबसे अधिक

सूत्रों का कहना है वरिष्ठता के आधार पर अगला डीजीपी तय होने की संभावना अधिक है। ऐसे में प्रवीण सिंह नए डीजीपी बन सकते हैं। 1982 बैच के आईपीएस प्रवीण पिथौरागढ़ (अब उत्तराखंड में), बिजनौर, आजमगढ़, लखीमपुर खीरी और कानपुर के पुलिस कप्तान रह चुके हैं।

सहारनपुर रेंज के डीआईजी और वाराणसी जोन के आईजी रह चुके हैं। 2009 में मायावती ने उन्हें लखनऊ रेंज का आईजी बनाया था, लेकिन तीन महीने बाद ही वह प्रतिनियुक्ति पर हरियाणा चले गए थे।

2012 में प्रतिनियुक्ति से लौटे तो अखिलेश ने उन्हें एडीजी फायर सर्विसेज की जिम्मेदारी दी। इसी पद पर रहते हुए वह डीजी के पद पर प्रमोट हुए। 3 जुलाई 2015 को उन्हें सीबीसीआईडी का डीजी बनाया गया, लेकिन सात माह बाद ही उन्हें वापस डीजी फायर सर्विसेज के पद पर भेज दिया गया।

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