2018 में भारत की ग्रोथ रेट 7.2% और 2019 में 7.4% रहेगी: UN; रिफॉर्म्स और इन्वेस्टमेंट को बताया वजह

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न्यूयॉर्क. यूनाइटेड नेशंस (यूएन) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 2018 में भारत की ग्रोथ रेट 7.2% और 2019 में 7.4% रह सकती है। रिपोर्ट में इस ग्रोथ रेट को काफी पॉजिटिव बताया गया है। ग्रोथ रेट में बढ़ोत्तरी के लिए निजी क्षेत्र में इन्वेस्टमेंट और स्ट्रक्चरल इन्वेस्टमेंट को जिम्मेदार बताया है। गुजरात चुनाव के दूसरे फेज के पहले देश की ग्रोथ रेट में इजाफे का अनुमान मोदी सरकार के लिए अच्छी खबर हो सकती है। इससे पहले नवंबर में अमेरिकी एजेंसी Moody’s ने 13 साल बाद भारत की क्रेडिट रेटिंग में सुधार किया था। एजेंसी ने भारत की रेटिंग Baa3 से बढ़ाकर Baa2 की थी।

कैपिटल फॉर्मेशन घटकर 30% पर आया
यूएन ने “वर्ल्ड इकोनॉमिक सिचुएशन प्रॉस्पेक्ट्स’ के नाम से रिपोर्ट जारी की है। इसमें 2017 में 6.7% रही ग्रोथ रेट के 2018 में 7.2% और 2019 में 7.4% रहने का अनुमान जताया गया है।
ये भी कहा गया है कि 2017 की शुुरुआत में नोटबंदी के चलते विकास दर नीचे आई थी लेकिन अब उसमें पॉजिटिव संकेत मिलने शुरू हो गए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, “2010 में जीडीपी में ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन के शेयर में 40% की गिरावट आई थी, जिसकी वजह कुछ इंडस्ट्रियल सेक्टर में लो कैपेसिटी का होना और बैंकिंग-कॉरपोरेट सेक्टर की बैलेंस शीट में गड़बड़ियां थीं। अब कैपिटल फॉर्मेशन घटकर 30% रह गया है। इसकी वजह सार्वजनिक क्षेत्र में होने वाला निवेश है।”
हालांकि रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि अभी भी भारत में मॉनीटरी पॉलिसी को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

रिपोर्ट में और क्या कहा गया?
“भारत के वित्तीय घाटा (फिस्कल डेफिसिट) की स्थिति में सुधार दिखने लगा है। ऐसा लगता है कि 2018 में ये जीडीपी के 3.2% पर आ जाएगा।”
“वर्ल्ड इकोनॉमी 3% के रेट से बढ़ रही है। इससे लॉन्ग टर्म इश्यूज जैसे क्लाइमेट चेंज और असमानता से निपटने में मदद मिलेगी। साथ ही विकास के रास्ते में आने वाली रुकावटें दूर की जा सकेंगी।”
क्या कहा था Moody’s ने?
Moody’s ने अपने स्टेटमेंट में कहा, “भारत की रेटिंग अपग्रेड होने की वजह वहां हो रहे इकोनॉमिक रिफॉर्म्स हैं। जैसे-जैसे वक्त बीतता जाएगा, भारत की ग्रोथ में इजाफा होगा। यह भी मुमकिन है कि मीडियम टर्म में सरकार पर कर्ज का भार कम होता जाए।”
“हमारा मानना है कि रिफॉर्म्स को सही तरीके से लागू करने पर कर्ज के तेजी से बढ़ने और ग्रोथ कम होने का खतरा कम होगा।”
“भारत में हो रहे इंस्टीट्यूशनल रिफॉर्म्स ग्रोथ को रफ्तार देंगे। मोदी सरकार के पास अपने कार्यकाल का करीब आधा वक्त है। उम्मीद है कि सरकार रिफॉर्म्स को लेकर बड़े फैसले लेगी।”
“भारत सरकार अभी कई रिफॉर्म्स का खाका तैयार कर रही है। अगर इन्हें सही वक्त पर लागू किया गया तो देश में बिजनेस और प्रोडक्टिविटी तो बढ़ेगी ही, साथ ही फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) में भी बढ़ोत्तरी होगी।”
“भारत के रिफॉर्म प्रोग्राम की खासियत ये है कि उनमें झटका सहने की ताकत है। ये बताती है कि देश में ग्रोथ की और दुनिया के सामने खड़े होने की ताकत कितनी मजबूत है।”
प्रोडक्टिविटी बढ़ाएगा जीएसटी
Moody’s ने कहा कि जीएसटी जैसे रिफॉर्म्स से भारत में इंटरस्टेट बैरियर हटेंगे, लिहाजा प्रोडक्टिविटी बढ़ेगी।
“मॉनीटरी पॉलिसी में सुधार करके नॉन परफॉर्मिंग लोन्स (NPLs) की परेशानी से निपटा जा सकता है। सरकार के नोटबंदी, आधार से अकाउंट्स को जोड़ना और बेनिफिशियरी के बैंक खाते में डाइरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) जैसे सिस्टम से इकोनॉमी में अड़चनें कम हुई हैं।”

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