जिला कांग्रेस में दिखी आपसी फूट, आधे आए नहीं, जो आए वो भी एक मत नहीं दिखे

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नागौर. आपसी फूट के कारण चार साल पहले सत्ता से बाहर हुई कांग्रेस आज भी एकजुट नहीं हो पाई है। प्रदेश स्तर पर जहां प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट व पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गुट बंटे हुए हैं, वैसे ही नागौर जिले में भी कांग्रेस के दोनों गुट एक मंच पर आने में कतरा रहे हैं। बुधवार को नोटबंदी का एक साल पूरा होने पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर काला दिवस मनाने के लिए जिले के आधे कांग्रेस नेता ही विरोध-प्रदर्शन में शामिल हुए। जो शामिल हुए, उनमें भी कई लोगों ने पार्टी की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करते हुए विरोध दर्ज कराया। हालांकि वरिष्ठ नेता महेश शर्मा, जसवंत गुर्जर, राकेश मोरदिया आदि ने कांग्रेस के सिपाही के रूप में एकजुटता से काम करने की नसीहत दी, लेकिन शहर इस बात की चर्चा रही कि इतना कुछ होने के बावजूद यदि कांग्रेस सबक नहीं ले रही है तो इसका भगवान ही मालिक है।
प्रधानमंत्री ने आम आदमी पर किया हमला
जिलाध्यक्ष जाकिर हुसैन गेसावत ने कहा कि जिस पर 26/11 को मुम्बई में आतंकी हमला हुआ और उसमें कई लोग मारे गए, उसी प्रकार प्रधानमंत्री मोदी ने नोटबंदी की घोषणा कर आम नागरिक पर हमला किया, जिससे कई लोग मारे गए। लोगों को झूठे प्रलोभन देकर गुमराह किया। जिलाध्यक्ष ने कहा कि मोदी ने यूपी का चुनाव जीतने के लिए नोटबंदी का खेल खेला और विरोधी पार्टियों का जो फंड था उसे रद्दी की टोकरी में डाल दिया।
पूर्व प्रधान रिद्धकरण लोमरोड़ ने बात को संभालते हुए बड़े नेताओं के नहीं पहुंचने की बात कहा कि नरेन्द्र मोदी खुद चाय बनाते हुए प्रधानमंत्री बन गए तो हम क्यों नहीं। उन्होंने युवाओं से कहा कि हम बड़ा बनने की कोशिश करें। उन्होंने कहा कि कोई छोटा-बड़ा नहीं है, हम कांग्रेस के सिपाही हैं और इसके लिए जी-जान से काम करना है।

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