नगर निकाय चुनाव: योगी आदित्यनाथ के गढ़ में अपनों से ही पहले सभी दल लड़ रहे

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गोरखपुर। नगर निकाय के पहले दरवाजे को भेदने के लिए रण की सारी तैयारियां हो चुकी है। सभी दलों के सेनापति अपनी अपनी सेनाओं के साथ रणक्षेत्र में आ भी चुके हैं लेकिन रणभेरी बजने के साथ ही अपनी ही सेना में बगावत से सब परेशान हैं। भाजपा हो या सपा चुनाव मैदान में उतरने के पहले सबसे बड़ी चुनौती अपने ही बागियों से निपटना है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जिले में पार्टी की जीत के लिए बीजेपी कोई रिस्क नहीं लेना चाहती वहीं समाजवादी किसी भी सूरत में बीजेपी की राह में मुश्किलें कम नहीं होने देना चाहते। फिलहाल, एक दूसरे पर रणनीतिक चाल चलने की बजाय ये अपने अपनों की बगावती तीर झेलने को बेबस नजर आ रहे।

योगी के शहर में अपने हुए पराए बन रहे परेशानी का सबब
नगर निकाय चुनाव को लेकर गहमागहमी बढ़ गई है। बगावत के सुर तकरीबन हर दल बुलंद है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पार्टी में ज्यादा देखने को मिल रहा है। भाजपा के सत्ताधारी दल होने से टिकट के दावेदार भी अधिक होना लाजिमी है। नामांकन व पर्चा जांच के बाद जो स्थिति सामने आई है उसमें कार्यकर्ताओं को संतुष्ट करने में भाजपा असहज दिख रही है। कई वार्डो में भाजपा से बागी हुए कार्यकर्ता अब निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में हैं। पार्टी ने कई निवर्तमान पार्षदों का टिकट काट दिया है। वे काफी नाराज हैं और निर्दल प्रत्याशी में रूप में अपनी दावेदारी ठोक दी है। हालांकि, अंदरखाने में भाजपा के पदाधिकारी इन्हें मानने में जुटे हैं। निर्दल उम्मीदवार में रूप में दावेदारी करने वालों में तिवारीपुर से पार्षद ममता पटेल के पति श्रवण पटेल, आर्यनगर से पार्षद राजेश जयसवाल, शक्तिनगर से पार्षद चंद प्रकाश चंदू और जाफरा बाजार से पार्षद रामपाल यादव शामिल हैं। रामपाल ने अपने पुत्र कृष्णपाल यादव को निर्दलीय उम्मीदवार में रूप में चुनावी मैदान में उतारकर दांव लगाया है।
मालवीय नगर के मंडल अध्यक्ष मनोज अग्रहरि ने भी बगावत की राह अपना ली है। उन्होंने अपनी पत्नी बबिता को निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतारा है। बबिता अब गिरधरगंज वार्ड से चुनाव मैदान में हैं।
गीतानगर मंडल के युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष सुनील कुशवाह ने नरसिंहपुर से, मार्कण्डेय गुप्ता मंडल उपाध्यक्ष ने महेवा से, विशुनदेव शाही पूर्व महानगर उपाध्यक्ष ने मोहद्दीपुर से, चंद्रमोहन साहनी मंडल कार्यसमिति सदस्य ने गोपालापुर से निर्दली दावेदार में रूप में पर्चा दाखिल किया है।

समाजवादी भी कई वार्ड में एक दूसरे के खिलाफ मैदान में
नगर निकाय चुनाव को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल की कसौटी बताने वाली सपा अब खुद ही परेशानी में है। सपा में चल रहा अंतरकलह बाहर आ गया है। अंतरकलह रूपी जिन्न ने कई पदाधिकारियों को बगावती राह पकड़वा दी है। अब कुछ पदाधिकारी निर्दल प्रत्याशी में रूप में पर्चा भी दाखिल कर चुके हैं। रूठे पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के इस रवैये से पार्टी के माथे पर चिंता की लकीरें साफ़-साफ़ दिखने लगी है।
विधानसभा चुनाव हारने के बाद समाजवादी पार्टी के लिए नगर निगम चुनाव जीतना जरूरी बताया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गढ़ होने से सपा को यहां जीत हासिल करना बेहद जरुरी है। लेकिन सपा में सामने एक नई समस्या खड़ी हो गयी है। पार्टी में मची अंतर्कलह अब बगावती रूख अपना चुका है। जिन कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के बल पर पार्टी जीत में सपने संजो रही थी, उन्ही पदाधिकारियों ने मंजधार में फंसी पार्टी से किनारा कसते हुआ बगावत कर दिया है। कइयों ने निर्दलीय उम्मीदवारी कर विद्रोह कर दिया है।
पूर्व जिला महासचिव एवं पार्षद रहे मुस्लिम नेता तहव्वर हुसैन ने बगावत कर दी है। जाफ़राबाजार वार्ड से निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे। पूर्व जिला उपाध्यक्ष रमाशंकर सिंह ने भी बगावती राह अख्तियार किया है। इन्होंने अपनी पत्नी को मोहद्दीपुर वार्ड से निर्दल प्रत्याशी के तौर पर उतारा है। पूर्व में पार्टी के विधानसभा अध्यक्ष रहे वजीउल्लाह अंसारी भी टिकट ना मिलने से नाराज हो नरसिंहपुर वार्ड से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में हैं। महानगर सचिव रामकेवल निषाद भी टिकट ना मिलने पर विरोध करते हुए माधोपुर वार्ड से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अन्य उम्मीदवारों को चुनौती दे रहे हैं। इसी तरह से रुस्तमपुर से पार्षद संजय सिंह अपनी मां को निर्दलीय उम्मीदवार बनाकर चुनावी महासमर में कूद चुके हैं। नरसिंहपुर से पार्षद नजमा बेगम निर्दल उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में जोर-आजमाइश कर रहीं हैं।

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