प्रदूषण बढ़ा तो दिल्ली को याद आई रेलवे की रो-रो सेवा

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दिल्ली की सड़कों पर ट्रकों की भीड़ कम करने के लिए दिल्ली रेल मंडल ने रोल ऑन रोल ऑफ (रो-रो) सेवा की शुरु करने की योजना बनाई थी. ट्रॉयल भी हुआ था. कुछ ट्रक को ट्रेन में लोड कर दिल्ली के बाहर छोड़ा गया था. आजकल दिल्ल-एनसीआर वासियों को रो-रो सेवा की याद आ रही है. वो भी तब जब दिल्ली में ट्रकों की एंट्री पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है. ये फैसला दिल्ली में एकदम से प्रदूषण बढ़ने के बाद उठाया गया है.

लेकिन लगता है कि रेलवे की ये योजना सफल नहीं हुई. ट्रॉयल के बाद एक बार भी रो-रो का फायदा दिल्लीवासियों को नहीं मिला. सूत्रों की मानें तो रेलवे अब रो-रो सेवा शुरु करने के पक्ष में भी नहीं दिख रहा है. इसकी एक बड़ी वजह है ओवर हेड इलेक्ट्रिक वायर.

जानकारों का मानना है कि ओवर हेड इलेक्ट्रिक वायर की ऊंचाई बहुत ही कम है. जबकि ट्रेन पर रखे जाने के बाद ट्रक की ऊंचाई बढ़ जाती है. ट्रक में लदा माल भी उसकी ऊंचाई को और बढ़ा देता है. इसी के चलते निकट भविष्य में इसके शुरू होने की भी संभावना भी नहीं दिख रही है. इस सेवा में ट्रकों को मालगाड़ी पर लादकर एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाया जाता है.

2 मार्च को पटेल नगर रेलवे स्टेशन से इस सेवा का उद्घाटन किया था. कहा गया था कि इस सेवा का लाभ गुरुग्राम से मुरादनगर के बीच मिलेगा., लेकिन उद्घाटन के बाद कोई भी मालगाड़ी ट्रकों को लेकर नहीं चली है. दिल्ली के मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) के अनुसार, ओवर हेड इलेक्ट्रिक वायर (ओएचई) इसके आड़े आ रहा है. उन्होंने कहा पुल बंगश, पुल मिठाई और मथुरा रोड आरओबी (रोड ओवर ब्रिज) की ऊंचाई कम है.

ट्रेन पर बड़ा ट्रक लोड किया जाएगा तो ओएचई से संपर्क होने का खतरा है. इसलिए निर्धारित रेल मार्ग पर बड़े ट्रक को रो-रो सेवा से भेजना संभव नहीं है. छोटे कंटनेर से सामान भेजने में व्यापारी ज्यादा रुचि नहीं दिखा रहे हैं. हां ये जरूर है कि किसी अन्य रेलमार्ग पर इसे चलाने पर विचार किया जाएगा.

गौरतलब रहे कि दिल्ली में प्रदूषण की समस्या को देखते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने रेल प्रशासन से रो-रो सेवा की संभावना तलाशने को कहा था. उस समय भी रेलवे अधिकारियों ने ओएचई की समस्या बताई थी. लेकिन इस वर्ष मार्च में इसे शुरू करने की घोषणा कर दी गई थी

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