पेट्रोल-डीजल की कीमतों के गणित को ऐसे समझिए, क्या प्रधान की सलाह मानेंगे जेटली?

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पेट्रोल और डीजल की बेलगाम होती कीमतों को लेकर देश भर में आक्रोश में बढ़ता जा रहा है. सवाल ये है कि वित्तमंत्री अरुण जेटली की अगुवाई वाली जीएसटी काउंसिल क्या पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की उस सलाह पर ध्यान देगी, जिसमें उन्होंने कहा था कि पेट्रोलियम उत्पादों की बढ़ती कीमतों को थामने के लिए इन्हें जीएसटी के दायरे में लाना जरूरी है.धर्मेंद्र प्रधान ने ट्वीट किया था कि ‘पेट्रोलियम पदार्थों की न्यायसंगत कीमतों के लिए इसे जीएसटी के दायरे में लाना ही एक मात्र रास्ता है.’ बता दें कि पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें पिछले तीन सालों में सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं. पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाने से कीमतों में गिरावट आएगी.

मुंबई में पेट्रोल की कीमतें 80 रुपया प्रति लीटर को छू गई है, तो दिल्ली में यह 70 रुपया प्रति लीटर के करीब है. अगर पेट्रोल को जीएसटी के दायरे में लाया जाता है, तो जीएसटी की 12 प्रतिशत टैक्स दर के हिसाब से दिल्ली में इसकी कीमत 38.10 रुपया प्रति लीटर होगी.

अगस्त 2014 में आखिरी बार पेट्रोल 70 रुपया प्रति लीटर के हिसाब से बिका था, लेकिन उस समय कच्चे तेल की कीमत 98 यूएस डॉलर प्रति बैरल थी. लेकिन, अब कच्चे तेल की कीमतें 50 यूएस डॉलर बैरल के करीब घूम रही हैं.

पेट्रोल और डीजल इतना महंगा क्यों बिक रहा

दिल्ली में पेट्रोल की बढ़ती कीमतों को लेकर इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन की ओर से जारी डाटा के मुताबिक रिफाइनरी में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 26.65 रुपया प्रति लीटर पड़ रही है. डीलरों को यह 30.70 रुपया प्रति लीटर पड़ता है. लेकिन, दिल्ली में पेट्रोल 70.39 रुपया प्रति लीटर बिक रहा है. इसका मतलब ये है कि प्रति लीटर 39.41 रुपया टैक्स के रूप में और डीलरों के कमीशन के रूप में जा रहा है.

अब, जबकि ज्यादातर उत्पाद जीएसटी के दायरे में आ गए हैं.  पेट्रोलियम पदार्थ अब भी वैट सिस्टम के दायरे में हैं. अलग-अलग राज्यों में वैट की अलग-अलग कीमतों के चलते पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें अलग-अलग हैं.

पेट्रोलियम प्लानिंग और एनालिसिस सेल (पीपीएसी) के उपलब्ध डाटा के मुताबिक दिल्ली में पेट्रोल पर 27 प्रतिशत वैट लगता है, मुंबई, थाने और नवी मुंबई में यह 47.64 प्रतिशत है. इसकी वजह से दो शहरों में पेट्रोल की कीमतों में 9 रुपये के अंतर को समझा जा सकता है.

पेट्रोल की कीमतों में केंद्र सरकार का शेयर

केंद्र सरकार पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी लगाती है. पीपीएसी के डाटा के मुताबिक नवंबर 2014 के बाद से पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 54 प्रतिशत बढ़ गई है. अगर वैट के हिसाब से देखें तो औसत आधार पर 46 प्रतिशत की बढ़ोतरी है. वहीं पेट्रोल पर डीलरों के कमीशन में 73 फीसदी का इजाफा हुआ है.

इसी तरह डीजल के मामले में भी एक्साइज ड्यूटी 154 प्रतिशत बढ़ गई है. वैट में 48 फीसदी की वृद्धि है, जबकि डीलरों का कमीशन 73 प्रतिशत के करीब है. 2014 के बाद से पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 12 बार बढ़ाई जा चुकी है.

 

पेट्रोलियम उत्पादों पर केंद्र और राज्य सरकार के दोहरे टैक्स की वजह से पेट्रोल और डीजल की कीमतें एक बार फिर आसमान को छू रही हैं, जबकि कच्चे तेल की कीमतों में 2014 के मुताबिक तुलनात्मक आधार पर 50 फीसदी की कमी आई है.

हालांकि आश्चर्य की बात है कि 2014-15 में पेट्रोलियम उत्पादों से मिलने वाला राजस्व 3.32 लाख करोड़ था और 2016-17 में यह 5.24 लाख करोड़ हो गया.

पेट्रोलियम के GST के दायरे में आने पर क्या होगा?

पेट्रोल और डीजल के जीएसटी के तहत आने पर कीमतों में बड़ी गिरावट आएगी. जीएसटी में टैक्स की पांच दरें… 0, 5, 12, 18 और 28 फीसदी है. लेकिन, पेट्रोल और डीजल को 12 फीसदी टैक्स दायरे से नीचे नहीं रखा जा सकता.

ऐसे में 12 फीसदी टैक्स रेट के हिसाब से दिल्ली में पेट्रोल की कीमतें 38.1 रुपया प्रति लीटर होंगी. जोकि मौजूदा कीमत से 32 रुपया सस्ता होगा. 18 फीसदी टैक्स रेट के मुताबिक दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 40.05 रुपया प्रति लीटर होगा और 28 फीसदी की दर से दिल्ली में इसकी कीमत 43.44 रुपया प्रति लीटर होगी.

अगर जीएसटी के तहत पेट्रोल पर 28 फीसदी टैक्स रेट के ऊपर एसयूवी सेस लगाया जाता है, तो दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 50.91 रुपया प्रति लीटर होगी. जोकि मौजूदा कीमत से 20 रुपया कम होगी.

इसी तरह दिल्ली में डीजल की मौजूदा कीमत 58.72 रुपया प्रति लीटर है. 12 फीसदी जीएसटी के मुताबिक इसकी कीमत 36.65 रुपया प्रति लीटर होगी. 18 फीसदी जीएसटी के मुताबिक डीजल 38.61 रुपया प्रति लीटर बिकेगा.

28 फीसदी जीएसटी रेट के मुताबिक डीजल दिल्ली में 48.88 रुपया प्रति लीटर होगा. अगर एसयूवी सेस लगा दिया जाता है तो ग्राहकों को एक लीटर ईंधन के लिए 49.08 रुपया प्रति लीटर देना होगा. जोकि मौजूदा कीमत से 9.64 रुपया सस्ता होगा.

लेकिन, पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाने पर राजनीति भी खूब है. जीएसटी एक्ट के मुताबिक पेट्रोलियम उत्पादों को लाने का इसके दायरे में लाने का फैसला केवल जीएसटी काउंसिल ही कर सकती है. ध्यान रहे कि जीएसटी काउंसिल में राज्यों की भी भागीदारी है. ऐसे में पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी में लाना टेढ़ी खीर जैसा है.