मनमोहन ने इमाम बुखारी को दिया था आश्वासन, HC ने मंगाए दस्तावेज

0
72

दिल्ली स्थित जामा मस्जिद के शाही इमाम को अक्टूबर 2004 में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की ओर से व्यक्तिगत रूप से दिए गए ‘आश्वासन’ पर दिल्ली हाईकोर्ट ने सवाल उठाया है. इस ‘आश्वासन’ में पूर्व प्रधानमंत्री ने शाही इमाम से कहा था कि जामा मस्जिद को संरक्षित इमारत नहीं घोषित किया जाएगा. बता दें कि केंद्र सरकार की अनुमति के बिना एक संरक्षित इमारत का उपयोग मीटिंग, रिसेप्शन, कॉन्फ्रेंस या मनोरंजक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए नहीं किया जा सकता.

हाईकोर्ट इस मसले में यह जानना चाहता है कि पूर्व प्रधानमंत्री ने किन वजहों से शाही इमाम को इस तरह का पत्र लिखकर आश्वासन दिया. और यूपीए-1 की सरकार ने किन वजहों से फैसला लिया कि मस्जिद को संरक्षित इमारत घोषित नहीं किया जाएगा. हाईकोर्ट ने इससे संबंधित सारे दस्तावेज मंगवाए हैं.

यह पहली बार है जब दिल्ली हाईकोर्ट ने संस्कृति मंत्रालय से इस फैसले से संबंधित सभी फाइलें मंगवाई हैं. कोर्ट ने निर्देश दिया है कि मंत्रालय मामले से जुड़े सभी मौलिक दस्तावेज उपलब्ध कराए. दिल्ली हाईकोर्ट की ओर से पारित इस आदेश में पूर्व प्रधानमंत्री की ओर से शाही इमाम को लिखे गए पत्र का भी खासतौर पर जिक्र है. मनमोहन सिंह ने 20 अक्टूबर 2004 को यह पत्र लिखा था.

अंग्रेजी अखबार इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक कोर्ट ने यह निर्देश सुहैल अहमद खान की ओर से दाखिल की गई याचिका पर दोबारा शुरू हुई सुनवाई के दौरान दिए. खान की मांग है कि मस्जिद को संरक्षित इमारत घोषित किया जाए.

मनमोहन सिंह के लेटर का जिक्र करते हुए याचिकाकर्ता के वकील देविंदर पाल सिंह ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री का पत्र इस बात का सीधा सबूत है कि कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में शाही इमाम के समर्थन की कीमत चुकाई. गौरतलब है कि जामा मस्जिद के शाही इमाम ने 2004 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के समर्थन की घोषणा की थी.

हालांकि शाही इमाम के वकील इस विरोध किया और कहा कि मसले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की जा रही है.