शेल कंपनियों पर बढ़ी सख्ती, खातों से पैसा निकालने पर हो सकती है 10 साल तक सजा

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सरकार ने शेल कंपनियों और उनके काले धन पर अंकुश के लिए सख्ती और बढ़ा दी है. अब रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज की सूची से बाहर की गई कंपनियों के बैंक खातों से पैसा निकालने की कोशि‍श करने वाले अधिकारी को 10 साल तक की सजा हो सकती है.

कॉर्पोरेट गवर्नेंस की शर्तें हुईं कड़ी

कार्पोरेट गवर्नेंस के नियमों और प्रक्रियाओं को सशक्त करने के प्रयास के तहत सरकार ने बुधवार को कुछ बड़े निर्णय लिये हैं, जिससे ये शर्तें और कड़ी होंगी. सकार ने निर्णय लिया गया है कि सूची से हटाई गई कंपनियों का कोई निदेशक या प्राधिकृत हस्ताक्षरकर्ता अगर उसके बैंक खाते से गलत तरीके से पैसा निकालने का प्रयास करता है तो उसे कम से कम 6 महीने और अधि‍कतम 10 साल तक की सजा हो सकती है. यही नहीं, कंपनियों द्वारा लोकहित से जुड़ा धोखाधड़ी का मामला पाये जाने पर कम से कम 3 वर्ष की सजा और जुर्माना लगाया जा सकता है. यह जुर्माना संबंधित राशि का 3 गुना होगा.

कॉर्पोरेट मामलों के राज्य मंत्री पी पी चौधरी ने कहा कि फर्जी कंपनियों को खत्म करने की कार्रवाई से काले धन के खतरे पर रोक लगेगी, लेकिन इससे व्यापार में सुगमता को प्रोत्साहन मिलेगा और निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा.

गौरतलब है कि सरकार ने मंगलवार को कहा कि उसने नियमों का अनुपालन नहीं करने वाली 2.09 लाख कंपनियों रजिस्ट्रेशन समाप्त कर दिया है और इन कंपनियों के बैंक खातों से लेनदेन पर प्रतिबंध लगाने की कारवाई शुरू कर दी गई है. शेल यानी मुखौटा कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखते हुए सरकार ने कहा है कि जिन कंपनियों के नाम रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (आरओसी) के रजिस्टर से हटा दिए गए हैं, वे जब तक नियम और शर्तों को पूरा नहीं कर लेती हैं और नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल द्वारा उनको वैध नहीं ठह‍रा दिया जाता, तब तक उनके निदेशक कंपनी के बैंक खातों से लेनदेन नहीं कर सकेंगे. संदेह है कि इन मुखौटा कंपनियों का इस्तेमाल कथित तौर पर अवैध धन के लेन-देन और कर चोरी के लिये किया जाता रहा था.

वित्तीय सेवा विभाग (डीओएफएस) द्वारा 5 सितंबर 2017 को सभी बैंकों को जारी निर्देशों के अनुसार, ऐसी कंपनियों के निदेशक (पूर्व) या उनके प्राधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं को बैंक खातों से परिचालन पर रोक लगाई गई है और वे ऐसी सूची से हटाई गई कंपनियों के खातों से बेईमानी से पैसा नहीं निकाल सकेंगे. हालांकि ऐसी कार्रवाई करने से पहले, यदि वे बेईमानी से पैसा निकालते हैं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

अयोग्य घोषित होंगे निदेशक

कॉर्पोरेट मामलों के राज्य मंत्री पी पी चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित एक समीक्षा बैठक में बुधवार को यह भी निर्णय लिया गया कि ऐसी फर्जी कंपनियों के निदेशकों, जिन्होंने 3 वर्ष या इससे अधिक वर्षों से रिटर्न नहीं भरा है, उन्हें उस कंपनी में जहां वे निदेशक के रूप में काम कर रहे हैं या किसी अन्य कंपनी में निदेशक के रूप में नियुक्ति या निदेशक के रूप में पुनर्नियुक्ति के लिए अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा और उन्हें पद छोड़ने के लिए बाध्य किया जाएगा. यह आशा की जाती है कि इस कवायद से ऐसे कम से कम 3 लाख अयोग्य निदेशकों पर रोक लगायी जा सकेगी.