मोदी के सामने नहीं चली चीन की चाल, PAK के आतंकवाद पर वही किया जो करना चाहते थे

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रिक्स बैठक में हिस्सा लेने के लिए चीन में हैं. ब्रिक्स समिट के दोनों दिनों ने पीएम मोदी ने हर मंच पर आतंकवाद का मुद्दा उठाया. समिट शुरू होने से पहले चीन ने कहा था कि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पर जिक्र नहीं होगा, लेकिन पीएम मोदी के सामने चीन की एक ना चली. और हर मुद्दे पर आतंकवाद, चीन और पाकिस्तान को करारा जवाब मिला.

मंगलवार को BRICS में बिजनेस काउंसिल को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि सभी देशों को आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लड़ना होगा. हम सभी को आतंकवाद से लड़ने के लिए नए कदम उठाने होंगे. मोदी ने कहा कि हम मजबूत अंतरराष्ट्रीय संबंधों के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं. पीएम ने अपने भाषण में सबका साथ-सबका विकास की बात की. पीएम बोले कि हमारे लिए आतंकवाद, साइबर सुरक्षा और आपदा प्रबंधन से लड़ने को तैयार होना होगा.

घोषणापत्र में भी हुआ जिक्र

इससे पहले ब्रिक्स श्यामन 2017 के घोषणापत्र में आतंकवाद का जिक्र किया गया है. इस घोषणापत्र में लश्कर-ए-तयैबा, जैश-ए-मोहम्मद समेत कुल 10 आतंकी संगठनों का जिक्र है.

क्या कहा गया है घोषणापत्र में ?

ब्रिक्स समिट में भारत ने आतंकवाद का मुद्दा उठाया. ब्रिक्स श्यामन घोषणापत्र के 48वें पैराग्राफ में आतंकवाद पर कड़ी चिंता व्यक्त की गई है. इसमें लिखा गया है कि हम लोग आस-पास के इलाके में फैल रहे आतंकवाद और सुरक्षा की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हैं.

 घोषणापत्र में कहा गया है कि हम लोग दुनिया भर में हुए आतंकी हमलों की कड़ी निंदा की. इसमें कहा गया है कि आतंकवाद को किसी भी तरह से स्वीकार नहीं किया जा सकता है. घोषणापत्र में साफ तौर पर कहा गया है कि सभी ब्रिक्स देश आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लड़ेंगे.

पहले क्या बोला था चीन?

आपको बता दें कि ब्रिक्स समिट शुरू होने से पहले चीन ने आतंकवाद पर बात करने से मना किया था. विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद के विरुद्ध प्रयासों में सबसे आगे है और उसने इसके लिए बलिदान दिया है. हुआ ने कहा कि “अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को पाकिस्तान द्वारा किए गए योगदान व बलिदान को मान्यता देनी चाहिए.”

उन्होंने कहा, “हमने पाया है कि जब पाकिस्तान के आतंकवाद विरोधी होने की बात आती है तो भारत की कुछ चिंताएं हैं, मैं नहीं सोचती कि यह ऐसा मुद्दा है जिस पर ब्रिक्स में चर्चा की जानी चाहिए.”

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