ब्रेकअप के बाद क्या वाकई और खूबसूरत हो जाती हैं लड़कियां…

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अमेरिका मे सोशलिस्ट पार्टी के आने पर सबसे पहले 28 फरवरी 1909 को महिला दिवस मनाया गया.उस समय रूस में जूलियन कैलेंडर चलता था और बाकी दुनिया में ग्रेगेरियन कैलेंडर. इन दोनों की तारीखों में कुछ अन्तर है. जूलियन कैलेंडर के मुताबिक 1917 फरवरी का आखिरी रविवार 23 फरवरी को था, जबकि ग्रेगेरियन कैलैंडर के अनुसार उस दिन 8 मार्च था.तभी से दुनिया भर में 8 मार्च को ही ‘महिला दिवस’ मनाया जाने लगा.

हाथों मे हमेशा हैंड बैग

एक अध्‍ययन में पाया गया है कि लड़कियां हमेशा अपने हाथों में पर्स या कैरी बैग लेना पसंद करती हैं.

कपड़ों की कमी

दुनिया में शायद ही ऐसी महिला हो जो ये कह दे कि उसके पास काफी कपड़े है. यह माना गया है कि महिलाओं का वॉर्डरोब भले ही कपड़ों से खचाखच भरा हो, लेकिन उन्हें हमेशा यह शिकायत रहेगी कि उनके पास पहनने के लिए कपड़े नहीं है.

 

अकेले में खाती हैं खूब

महिलाएं अगर किसी पुरुष के साथ डेट पर जाती हैं और उन्हें वह खाने के लिए ऑफर करे तो मना करती हैं लेकिन असलियत ये है कि जब वह अकेली होती हैं तो खूब खाती हैं. 

2 मिनट मतलब 2 घंटे

जहां पुरुष किसी पार्टी के लिए तैयार होने में 15 से 20 मिनट लगाते हैं, वहीं महिला 2 मिनट बोलकर 2 घंटे लगा देती है. दरअसल तैयार होते वक्त वह खुद ही संतुष्ट नहीं हो पाती कि वह सुंदर लग रही है.

शॉपिंग के वक्त करती है ड्रामा

ज्यादातर महिलाएं शॉपिग पर जाते वक्त कन्फ्यूज रहती हैं. वह जिस चीज को लेने के लिए घर से निकलती हैं, उसके अलावा फालतू का समान लेकर आ जाती हैं. 

मोल-भाव करती है

महिलाएं मोल-भाव करना अपना धर्म समझती हैं.मार्केट में वह हर चीज का मोल-भाव करना शुरू कर देती हैं. अगर उन्हें कुछ खरीदना भी ना हो तो भी मोल-भाव करके टाइम-पास करती हैं.

 दूसरों के कपड़ों पर नजर

महिलाएं पब्लिक प्लेस पर पुरुष से ज्यादा दूसरी महिलाओं के कपड़ों को देखती हैं और फिर बाद में उनका स्टाइल कॉपी करती हैं. 

ब्रेक बाद आता है और निखार
दिल टूटने के बाद भले ही महिलाएं कितनी ही रोएं लेकिन एक शोध के अनुसार, ब्रेकअप के कुछ दिन बाद वह खुद का एक्स्ट्रा ख्याल रखती हैं. उनकी पूरा फोकस खुद के लुक्स पर होता है.

 
 

 

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